प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, भविष्य में कभी बीमार हुए तो उसके लिए अभी से ही पैसों की व्यवस्था करके रखना होगी न?
आचार्य प्रशांत: बीमारी जब आएगी उसके लिए तुम अभी से बीमारी का जीवन जीना चाहते हो? तुम्हें इतनी घनी और इतनी बड़ी बीमारी आ गयी कि नहीं जी सकते तो मर जाना, पर जब तक जियो कम-से-कम आज़ाद जियो।
प्र नहीं सर, जितना जी रहे हैं उतना मस्ती में जी रहे हैं।
आचार्य: ठीक, जब बीमारी आए तो मर जाना। अगर इतनी बड़ी बीमारी आ गई है कि बिना लाखों-करोड़ों लगाए उसका उपचार ही नहीं है, तो मर जाओ। ज़बरदस्ती लाश को जिलाए रखने से फायदा क्या? मरने से इतना डर क्यों? और मुर्दा जीवन से इतना मोह क्यों?
कैंसर होगा तुम्हें सत्तर की उम्र में।
प्र: मुझे पच्चीस साल की उम्र से है।
आचार्य: तुम्हे पच्चीस की उम्र में हो गया न। लोग हुए हैं जो इक्कीस की उम्र में, बिना कैंसर के, भरेपूरे और स्वस्थ शरीर के साथ हँसते-हँसते फाँसी चढ़ गए। तुमने तो चार साल ज़्यादा जी लिए। तुमने तो फिर भी चुना नहीं था तुम्हें कैंसर हो जाए।


