प्रश्न: आचार्य जी, बाबा शेख फ़रीद, ऐसा क्यों बोल रहे हैं, कि “जो तुमसे भय मानता हो, तुम उससे भय मानो?”
आचार्य प्रशांत: तो, कहा है कि जो तुमसे भय मानता हो, तुम उससे भय मानो।बताते हैं कि बाबा फ़रीद के उपदेशों में से समझेंगे। आप यदि किसी से भय मानते हैं, तो क्यों? और आप कौन हैं अगर आप भय मानते हैं? दुनिया में एक से एक भीरु देखे होंगे आपने, वो डरते ही रहते हैं, भयाक्रांत। डरने वाला क्यों डरता है? और निडर कौन होता है? डरने वाला क्यों डरता है? और कौन है जग में जो निडर होता है?
जिसे कुछ खोने का डर है, वो डरता है। जिसे भाव है कि कुछ छिन सकता है, वो डरता है। और निडर कौन है? निडर वो है जिसने कुछ ऐसा पा लिया जो अब छिन नहीं सकता। जो खोया नहीं जा सकता। जिसके नष्ट होने की, मिट जाने की कोई संभावना नहीं। डरेगा वही जो उसमें जियेगा, जो नकली है। डर, वास्तव में, हमेशा अहंकार के चोट खाने का, अपने भ्रमों के टूटने का ही होता है, इसके अतिरिक्त और कोई डर होता नहीं। जिस चीज़ से आप जुड़े बैठे हो, अगर वो कमज़ोर है, तो डर तो सताएगा। वो चीज़ टूटी तो मैं भी टूट जाऊंगा क्योंकि मैंने उससे अब रिश्ता बाँध लिया है।
तो, कौन है जो डरता है?
जो नकली में जी रहा है, जो सपनों में जी रहा है, जो भ्रम में जी रहा है। जो सत्य के विरुद्ध खड़ा है, वही डरेगा। फ़रीद कह रहे हैं, “ऐसे से तुम डरो, ऐसे से तुम बचो।” क्यों?
क्योंकि वो डरा हुआ है। जो डरा हुआ है, वो हिंसक हो जाता है। जो डरा हुआ है, वो सच्चाई को झेल नहीं सकता। वो संख्या में आश्रय पाता है, वो अपने जैसों की तादाद बढ़ाना चाहता है। आपने देखा है ना, जब आप डर जाते हैं तो आप भीड़ की और भागते हैं। अँधेरा हो, निर्जन हो, अकेलापन, आपको बड़ा सुकून मिलता है अगर आपको पांच छह लोग कहीं दिख जाएँ, आपको उनका साथ मिल जाए। जो डरा है, वो तादाद मांगेगा, संख्या मांगेगा। कैसों की? अपने जैसों की।




