प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक चीज़ है जो मुझे बहुत परेशान करती है। मैं इसे एक धारणा के रूप में साझा करना चाहता हूँ और इसपर आपके विचार जानना चाहता हूँ — जैसे-जैसे आप जीवन में आगे बढ़ते हैं, जीवन आपको बढ़ने में मदद करता है। जीवन विकास के बारे में है। लेकिन जब आप दुनिया को देखते हैं, न केवल भारत में, हर जगह, आप देखते हैं कि तकनीक बढ़ रही है, बहुत कुछ भौतिक रूप से बढ़ रहा है। बहुत सारे नए विचार आ रहे हैं। लेकिन जब आप मूल्यों को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि इंसान के चरित्र में गिरावट आ रही है, चाहे वह बच्चा हो या उसके माता-पिता या वह कोई भी हो। आपको क्या लगता है कि यह भविष्य हमें कहाँ ले जाएगा?
आचार्य प्रशांत: वो इसलिए हो रहा है क्योंकि जैसे आपने अपनी बात की शुरुआत ही यह कह कर करी कि जीवन का उद्देश्य प्रगति, तरक्की है, वैसे ही हर कोई तरक्की करना चाहता है। आपने कहा कि वैल्यूज़, मूल्य गिर रहे हैं। गिर नहीं रहे। सबके पास एक ही सर्वोपरि मूल्य है, और वो है *ग्रोथ*। और वो तो आप भी मान रहे हैं। आप कह रहे हैं जीवन में तरक्की होनी चाहिए। हर कोई तरक्की करना चाहता है, और यदि तरक्की ही सबसे प्रथम मूल्य है, तो फिर उसके लिए जो भी करना पड़े कम है। बाकी सारे मूल्य अब उसके सामने कोई हैसियत नहीं रखते।
निश्चित रूप से शुरुआत में ही कहीं ग़लती हो रही है। निश्चित रूप से ग्रोथ, तरक्की कोई मूल्य हो ही नहीं सकता। जीवन का उद्देश्य हो ही नहीं सकता। आप ग्रोथ की बात ही कब करते हैं? मैं वापस आता हूँ स्थिति पर, वर्तमान पर। आप तरक्की कब चाहते हैं? आप तरक्की सिर्फ़ तब चाहते हैं जब पहले आपको ये एहसास करा दिया गया हो कि आप अभी पिछड़े हुए हैं। जो अपने-आपको दुर्गति में मानता है, जिसने अपने-आपको दुर्गति में जाना है, वही तो कहेगा कि, "अब मुझे प्रगति चाहिए।" प्रगति हम सब को चाहिए। प्रगति चाहने वाले कभी अपने-आपसे नहीं पूछ रहे हैं कि, "ऐसी क्या दुर्गति है हमारी जो हमें प्रगति चाहिए?"
और चूँकि मुझे पता है कि हममें से बहुत सारे अभिभावक हैं तो इसीलिए मैं दोबारा बच्चों पर आता हूँ। बच्चों को लगातार यही सिखाते रहते हैं तरक्की करना। आप ये नहीं देख रहे कि ऊपर-ऊपर से तो आप उनसे ये बोल रहे हो तरक्की करना और आगे बढ़ना, और भीतर-ही-भीतर आप उनके अंदर ये धारणा मज़बूत किए दे रहे हो कि तुममें अभी कोई खोट है। अगर मुझमें कोई खोट नहीं तो मुझे प्रगति की नहीं सिर्फ़ अभिव्यक्ति की ज़रूरत है।

