अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)

*साधो भाई जीवत ही करो आसा।***
*जीवत समझे, जीवत बुझे,* *जीवत मुक्तिनिवासा।*
*जीवत करम की फाँस न कटी,* *मुये मुक्ति की आसा।*
*तन छूटे, जिव मिलन कहत है,* *सो सब झूठी आसा।*
*अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा,* *नहिं तो जमपुर बासा।*
*सत्त गाहे, सतगुरु को चिन्हे,* *सत्त नाम बिस्वासा।*
*कहैं कबीर साधन हितकारी,* *हम साधन के दासा।।***
*~* *कबीर*




