स्वयं का बचाव जीवन से पलायन || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2015)

प्रश्न: सर, बच कर भाग जाने की प्रवृत्ति से कैसे बचूँ?
वक्ता: पहले ये समझते हैं कि ये भागने की प्रवृत्ति है क्या। और ये समझने के लिये अपनेआप से ये पूछना पड़ेगा कि “मैं ये जो कर रहा हूँ, ये मुझे बचाए रखेगा क्या? मैं जो कर रहा हूँ क्या ये मुझे बचाए रखेगा? अपने बचाव-मात्र के लिए कर रहा हूँ? या मैं जो हूँ, उसे जारी रखने, उसे आगे बढ़ाने के लिए करा रहा हूँ?”
बचाना, जारी रखना, बढ़ोतरी, ये तीनों एक ही बात हैं। अगर उस लिए कर रहे हो, तो ये क्या हुआ?
श्रोतागण: एस्केप।
वक्ता: ये एस्केप(पलायन) हुआ। एस्केप समझ गए अब क्या है?
किसी भी एक्टिविटी को एस्केप कब कहते हैं? जब वो तुम्हारे सेल्फ को बचाए रखे या और मजबूत करे या उसकी सुरक्षा करे । दिन में हमारी ९९ प्रतिशत एक्टिविटीज़ ऐसी ही होती हैं ना? हम जो हैं वही बने रहकर उन एक्टिविटीज़ को करते हैं।
