प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते, परिवार से, दोस्तों से और मोटिवेशनल स्पीकर्स से बहुत सारी मोटिवेशनल पंक्तियाँ सुनी हैं जैसे कि थिंक बिग, बड़ा सोचो, हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती, नेवर गिव अप (कभी हार न मानो), विनर्स नेवर क्विट एंड क्विटर्स नेवर विन (जीतने वाले कभी खेल नहीं छोड़ते और भगोड़े कभी नहीं जीतते), अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुम्हें दिलाने में जुट जाती है, डरो मत डर के आगे जीत है, लगे रहो। और इस तरह की कई बातें होती हैं। मैं आपको सुनता हूँ लेकिन आप मोटिवेशन के इतने खिलाफ़ क्यों प्रतीत होते हैं? कई बार तो ऐसे लगता है कि जैसे आप डिमोटिवेट (हतोत्साहित) ही कर रहे हों।
आचार्य प्रशांत: सुनिए, ज़रा ध्यान से, मोटिवेशन माने क्या होता है? आपको किसी चीज़ को पाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। है न? जब आप कहते हैं कि आपको मोटिवेट या प्रेरित किया जा रहा है तो वो किसी लक्ष्य के प्रति होता है न। किसी चीज़ को पाने के लिए आपको अभिप्रेरित, उत्साहित किया जा रहा है।
किस चीज़ को पाने के लिए, इस पर ध्यान नहीं दोगे? हर किसी को हर चीज़ पाने की कोई ज़रूरत तो नहीं होती। और अगर तुम अपने चारों ओर की दुनिया को देखो या अपने ही जीवन को देखो तो तुम्हें समझ में आएगा, साफ़ दिखाई देगा कि ज़्यादातर लोग जिन चीज़ों को चाह रहे होते हैं, वो चीज़े उनके लिए ना ज़रूरी होती हैं ना अच्छी होती हैं। और जिन चीज़ों की हमें सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है वाकई, उन चीज़ों के प्रति हम बिलकुल लापरवाह होते हैं। उन चीज़ों की सार्थकता से, उनकी अनिवार्यता से हम बिलकुल अनजान होते हैं। ऐसा बहुत दिखाई पड़ेगा न, गौर से देखना।
देखो लोग क्या-क्या खरीद रहे हैं, ये वो चाह ही रहे हैं न? उनको लग रहा है वो चीज़ उनको चाहिए तो खरीद रहे हैं और हम सब जानते हैं कि ज़्यादातर लोग जो चीज़ें खरीद रहे हैं, वो अनावश्यक ही होती हैं।


