जो संसार से मिले सो समस्या; समस्या का साक्षित्व है समाधान

श्रोता१: जो भी माइंड (मन) में थॉट्स (विचार) घूमते रहते हैं, वो तो हमेशा होते ही हैं।
वक्ता: हाँ, हाँ।
श्रोत१: लेकिन उनके बारे में सोचने लगता हूँ तो फ्रस्ट्रेशन अपने आप बढ़ती रहती है।
वक्ता: नहीं बढ़ेगा क्योंकि जिसको तुम फ्रस्ट्रेशन कह रहे हो ना, वो भी सिर्फ़ एक थॉट (विचार) है। इस बात को समझना, तुम कुछ मूलभूत बातें देख नहीं रहे हो, फ्रस्ट्रेशन क्या है थॉट (विचार) के अलावा? क्या कोई ऐसा है, जो सो रहा हो, गहरी नींद में हो और गहरी नींद में भी चिंतित हो, उत्तेजित हो, फ्रस्ट्रेटेड हो? कोई ऐसा है यहाँ पर? किसको देखा है कि वो सोते वक्त भी झुंझलाया हुआ है?
सारी झुंझलाहट तुम्हारी शुरू किस क्षण होती है, कभी देखा तुमने ये? तुम्हारी सारी झुंझलाहट शुरू कब होती है? तुम सो रहे हो, और तुम्हें होंगी सौ चिंताएँ, दुनिया होगी तुम्हारे लिए बहुत बड़ी मुसीबत, पर जब तक तुम सो रहे हो तब दुनिया है कहाँ? कहाँ है? और मैं गहरी नींद की बात कर रहा हूँ, सपने वगैरह नहीं ले रहे। सारी चिंताएँ किस पल शुरू होती हैं? जिस पल विचार शुरू होता है, जिस पल तुम सोचना शुरू करते हो। और याद रखना सोचना हक़ीकत नहीं है, सोचना कई बार यथार्थ भी नहीं है।

