प्रश्न: आपने अभी कहा कि जो बदल जाए वो झूठ है। तो जब मैं अपने जीवन को देखता हूँ तो मेरे जीवन में तो हर एक चीज़ बदल ही रही है। जैसे मन की स्थिति बदलती है, तो वह भी बदलाव ही है। कृपया प्रकाश डालें।
वक्ता: और जब कुछ बदलता है, तो तुम्हें कैसा लगता है? तुमने अपने-आप को परिस्थितियों के संदर्भ में ही जाना है। पूर्णतया परिस्थिति और संसार सापेक्ष होते हैं। जब कुछ बदलता है तो कैसा प्रतीत होता है? तुमने किसी से सम्बन्ध बैठाया, वो सम्बन्ध बदल गया – तुम्हें कैसा लगता है?
श्रोता १: बुरा।
वक्ता: और तुमने फिर किसी से सम्बन्ध बैठाया, अब तुम क्या चाहते हो कि खत्म हो जाए? बदल जाए या यथाव्रत रहे, क्या चाहते हो?
श्रोता १: बदले नहीं।
वक्ता:

