प्रश्नकर्ता: आचार्य जी कुछ समय पहले यूनाइटेड नेशंस का एक ट्वीट आया था उसमें उन्होंने कहा था कि माँसाहार क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के प्रमुख कारणों में से एक है इसलिए माँसाहार कम करें। तो यह ट्वीट आया और फिर कुछ घण्टों में या एक दिन के अंदर वो ट्वीट फिर से गायब हो गया। वह ट्वीट इसलिए गायब हुआ क्योंकि मीट (माँस) और डेयरी ऑर्गेनाइजेशन (दुग्ध उत्पादक संस्था) से कुछ दबाव आया था। तो इसका मतलब यह है कि जागरूकता अगर बन भी रही है तो उसको रोका जा रहा है।
आचार्य प्रशांत: साज़िश है! साज़िश है! जागरूकता है, जागरूकता दबाई जा रही है जानबूझकर के। ये साज़िश है। यूनाइटेड नेशन की ओर से ट्वीट आता है कि क्लाइमेट चेंज का प्रमुख कारण माँसाहार है लेकिन तमाम तरह की लॉबीज़ (संगठन) हैं, तमाम तरह के प्रेशर ग्रुप (दबाव समुह) हैं और तमाम तरह की संवेदनाओं को, सेंसिबिलिटी (भावनाओं) को ध्यान में रखना होता है तो फिर उन लोगों ने वो ट्वीट डिलीट कर दी। डिलीट इसलिए कर दी कि, "अरे अरे अरे कहीं मीट इंडस्ट्री (माँस उद्योग) को घाटा ना हो जाए, कहीं लोगों की धार्मिक मान्यताओं को ठेस ना लग जाए, कहीं लोगों की स्वाद लोलुपता को बुरा ना लग जाए।"
यह बात बच्चों को उनकी पाठ्य-पुस्तकों में कक्षा तीन से पढ़ाई जानी चाहिए, कि बिलकुल अगर व्यापक स्तर पर देखो तो क्लाइमेट-चेंज का मूल कारण है — आदमी की जनसंख्या और अगर हमारे कर्मों और चुनावों के तल पर देखो तो क्लाइमेट चेंज का कारण है — माँसाहार। यह बात बताई ही नहीं जा रही है। बहुत बड़ा कारण है। जैसा अभी तुमने बोला कि मीट इंडस्ट्री और डेयरी इंडस्ट्री हैं।
और यह दोनों बिलकुल आपस में जुड़ी हुई इंडस्ट्री हैं। डेयरी इंडस्ट्री हो ही नहीं सकती बिना

