न बंधन है,न मुक्ति चाहिए || आचार्य प्रशांत, उपनिषद पर (2014)
आचार्य प्रशांत
अपने सपनों का अर्थ जानो || आचार्य प्रशांत (2016)
सत्य में डूबते हैं, अंजाम का अनुमान नहीं लगाते || आचार्य प्रशांत (2016)
जिस दवा से मर्ज़ दूर हो रहा हो, उसे नमन करो और लेते रहो || आचार्य प्रशांत (2014)
हारोगे तुम बार-बार, बस कोई हार आखिरी न हो || आचार्य प्रशांत (2014)
ताकत मत माँगो, देखो कि क्या तुम कमज़ोर हो || आचार्य प्रशांत (2016)
मैं दुविधा में क्यों रहती हूँ? || आचार्य प्रशांत (2013)
धर्म को नशा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत (2015)
अप्प दीपो भव, अहम् ब्रह्मास्मि इत्यादि क्या तुम्हारे लिये हैं? || आचार्य प्रशांत (2013)
ख्याल को तथ्य मत समझ लेना || आचार्य प्रशांत (2013)
अनकहे को सुना तो अज्ञेय को जाना || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2015)
मुसीबतों को रोते हो और मदद को क्यों ठुकराते हो? || आचार्य प्रशांत (2013)
शरीर की नहीं, मन की मृत्यु से डरते हो तुम || आचार्य प्रशांत (2013)
असत्य कुछ नहीं, सब आंशिक सत्य है || आचार्य प्रशांत (2013)
कल्पना है शहद की धार,असली प्रेम खड्ग का वार || आचार्य प्रशांत (2013)
मन के बहकाव का क्या करें? || आचार्य प्रशांत (2013)
विद्रोह के लिए सामर्थ्य की प्रतीक्षा मत करो, विद्रोह से ही सामर्थ्य आता है || आचार्य प्रशांत (2013)
संसार श्रम, सत्य विश्राम || आचार्य प्रशांत (2013)
गुरु तुम्हें वो याद दिलाता है जो तुम जानते ही हो || आचार्य प्रशांत (2013)
बँधा मन बँधा जीवन, बँधा व्यवहार बँधे रिश्ते और संसार || आचार्य प्रशांत (2013)
माँ-बाप तुम्हारी ही तरह आम हैं, उनसे विशिष्टता की उम्मीद अन्याय है || आचार्य प्रशांत (2013)
ग्रन्थों के साथ सत्संग हो सकता है, तर्क या बहस नहीं || आचार्य प्रशांत (2015)
न कैद की कसक, न मुक्ति की ठसक || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
मन जब आत्मा में दृढ नहीं होता तब वो अपनी ही बनाई दुनिया में भटकता है || आचार्य प्रशांत (2015)
यदि उसे नहीं चाहता तुम्हारा प्रेमी, तो तुम्हें कैसे चाहेगा? || आचार्य प्रशांत (2015)
बदलाव से ही डरता है ये निरंतर बदलता मन || आचार्य प्रशांत (2015)
कभी रंग कभी धूप कभी धूमिल मैदान है,बदलते मौसमों में भी आसमान तो आसमान है || आचार्य प्रशांत (2015)
अपूर्ण पूर्ण के रूप में भी अपनी अपूर्णताओं को ही चाहेगा || आचार्य प्रशांत (2015)
क्यों ज़रुरी है कि संसार का काम चलता रहे? || आचार्य प्रशांत (2015)
डराने वाले को छोड़े बिना डर कैसे छोड़ोगे? || आचार्य प्रशांत (2015)