
उस अवस्था में अगर कोई दूसरा मिल जाता है तो आप उस दूसरे पर केंद्रित हो जाते हो। उस भीड़ से थोड़ी देर के लिए मुक्त हो जाते हो तो फिर आप कहते हो, ‘देखो! अकेलापन दूर हुआ।’ अकेलापन नहीं दूर हुआ है। भीड़ दूर हो गई है। जो अकेला कह रहा है अपने आप को, वो वास्तव में भीड़ का शिकार है।

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