“अकेलापन और निर्भरता” आज के समय की एक अत्यंत प्रासंगिक पुस्तक है। इसमें रिश्तों, अपेक्षाओं और भावनात्मक सहारे की हमारी आदतों पर गहराई से सवाल उठाए गए हैं। यह किताब सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारा अकेलापन वास्तव में बाहर की वजहों से है या भीतर की उलझनों से।