🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #pain #overcomechallenges #stressrelief #motivation वीडियो जानकारी: 28.08.24, प्रश्नोत्तरी सत्र, गोवा ज़िंदगी दर्द तो देगी ही, पर दर्द को दुख नहीं बनने देंगे || आचार्य प्रशांत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 0:48 - दर्द और दुःख का संबंध 7:51 - छोटी और बड़ी चीजों की पहचान 12:11 - जीवन की चुनौतियों का बेबाकी से सामना 18:27 - बोध साहित्य का उद्देश्य ; दुःख से मुक्ति 27:03 - चाहत उच्चतम की 30:23 - स्वयं की उपेक्षा 31:34 - समापन विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत ने जीवन में दर्द और दुख के अनुभवों पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि दर्द एक सामान्य अनुभव है, लेकिन जब हम उसे दुख मान लेते हैं, तब वह हमारे लिए समस्या बन जाता है। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि असली मूल्यवान चीजें हमारे भीतर होती हैं, जिन्हें कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं छीन सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम छोटी चीजों को बहुत महत्व देते हैं, तो वे हमारे लिए दुख का कारण बन जाती हैं। असली ताकत तब होती है जब हम अपनी आंतरिक तिजोरी को पहचानते हैं और छोटी-छोटी चीजों को महत्व नहीं देते। आचार्य जी ने यह सुझाव दिया कि हमें जीवन में आने वाले दर्द को स्वीकार करना चाहिए और उसे खेल की तरह लेना चाहिए। प्रसंग: जो सबसे ऊपर का हैं जब वो मुझसे छीन जाए तब जो होता है उसे दुख कहते है। ~ दर्द क्या है? ~ दर्द दुःख कब बन जाता है? ~ दुःख की परिभाषा क्या है? ~ दुःख क्या है? ~ दर्द को दुःख बनने से कैसे रोक सकते है? ~ दर्द को कौन और क्यों रोकने का प्रयास करते हैं? ~ आत्मज्ञान क्या है? ~ सार्थकता किसमें है? ~ दुःख किसपर निर्भर है? ~ असली खिलाड़ी कौन है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~