🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #motivation #inspiration #mahatmabudha #buddha #motivational #improvement #selfawareness #awareness #facts #books वीडियो जानकारी: 17.01.24, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नॉएडा Title : एक सन्यासी, एक नर्तकी, और कहानी ज़िंदगी की || आचार्य प्रशांत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 0:58 - मोटिवेशन इंडस्ट्री को कौन चला रहा है? 1:59 - हरमन हेस और सिद्धार्थ की कहानी 9:00 - अज्ञान और भीड़ के पीछे हमारी दौड़ 12:37 - मोटिवेशन एक भ्रम है 20:21 - गीता की सीख: मोटिवेशन रहित कर्म 23:48 - पूँजीवादियों का स्वार्थ और हमारे सपने 29:49 - झूठा हौसलावर्धन 33:54 - भजन 36:01 - समापन प्रसंग: वीडियो में सिद्धार्ध और कमला की कहानी पर चर्चा हुआ है, कहानी का कुछ अंश - यहाँ जो सिद्धार्थ है वो एक ब्राह्मण परिवार का लड़का है, और दिखने में भी अच्छा है पढ़ा-लिखा भी खूब है। और बिल्कुल तैयार हो रहा है पिता के पद चिन्हों पर चलने के लिए। गाँव की जो लड़कियाँ हैं उनके बीच में वो काफ़ी लोकप्रिय भी है। दिखने में बलिष्ट है, सुंदर है... ...वो एक दिन पिता को कहता है मैं वो काम नहीं करूँगा जो आप करते हैं। अंततः पिताजी कहते हैं अच्छा चलो जाओ। वो चला जाता है। उसका दोस्त होता है गोविंद, ये दोनों अपना चले जाते हैं और ये जाते हैं तो इनको गौतम बुद्ध मिलते हैं। अब ये बड़ी मजेदार बात है कि सिद्धार्थ को बुद्ध मिल जाते हैं। गोविंद बुद्ध की शरण में चला जाता है। सिद्धार्थ कहता है नहीं, मैं नहीं जाऊंगा, जब बुद्ध स्वयं किसी की शरण में नहीं गए तो मैं किसी की शरण में क्यों जाऊं? ...फिर ऐसे करते करते वो फिर एक शहर में पहुँचता है, तो कमला से मिलता है। और उसके प्रेम में पड़ जाता है... ~ मोटिवेशन क्या है? कामना के पीछे भागना और क्या? ~ बिना जाने कि तुम कौन हो और तुम्हें किधर को जाना चाहिए, किसी भी अंधी दिशा में भीड़ के पीछे दौड़ लगा लेने का नाम मोटीवेशन है। ~ जिसे मोटिवेशन चाहिए वो समझ लो राह ही गलत चल रहा है। जो सही राह चल रहा होगा, उसे मोटीवेशन की जरूरत पड़ी नहीं सकती। संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~