संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 06.03.2014, नॉएडा, भारत प्रसंग: ~क्या है जो है, ऐसा क्यों बोल रहे अष्टावक्र? ~संसार हैं, सपना हैं, सब है? ~जहाँ दिखे वहाँ देखो, जहाँ न दिखे वहाँ भी देखो ~क्या भ्रम भी है सत्य भी है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ अध्याय १८ श्लोक ४ भवोऽयं भावनामात्रो न किंचित् परमर्थतः। नास्त्यभावः स्वभावनां भावाभावविभाविनाम्॥ ~अष्टावक्र गीता अर्थ: भाव और अभाव के मध्यस्वभाव का कभी नाश नहीं होता