संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 15.01.2017, महर्षि रमण केंद्र, दिल्ली , भारत प्रसंग: ~कृष्ण ऐसा क्यों कह रहे है "जो मुझे जिस रूप में भजता है , मै भी उसे उसी रूप में भजता हूँ" ? ~जो भरम उसे भरम, जो परम उसे परम का क्या आशय है? ~हमारी जीवन में कृष्णत्व का क्यों अभाव है? ~परम पर हमेशा इल्जाम क्यों ? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ श्लोक 4 .11: ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ ११ ॥ हे अर्जुन ! जो भक्त मुझे जिस प्रकार भजते हैं, मैं भी उनको उसी प्रकार भजता हूँ; क्योंकि सभी मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं। ~श्रीमद्भगवद्गीता