🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #AcharyaPrashant #आचार्यप्रशांत वीडियो जानकारी: 02.05.2025, किरोड़ीमल कॉलेज, नई दिल्ली Title: गाँधी बनाम अम्बेडकर: सुधार बनाम विद्रोह || आचार्य प्रशांत, किरोड़ीमल कॉलेज, DU (2025) 📰 Source : https://docs.google.com/document/d/1OJZrG1ZxAS1-ZbUIC65K6MMA0HOnuh-_DxYXJBmsw3I/edit?tab=t.0 📋 Chapters: 0:00 - Intro 3:47 - गाँधी बनाम अम्बेडकर 9:43 - आरक्षण के बाद भी भेदभाव क्यों? 18:27 - जातिवाद की असली जड़ कहाँ है? 24:24 - क्या धर्म शोषण करना सिखाता है? 31:26 - क्रांति की शुरुआत कहाँ से होगी? 38:29 - धर्म का असली अर्थ 43:05 - डॉ अम्बेडकर: असली धार्मिक व्यक्ति 50:26 - Testimonial विवरण: किरोरीमल कॉलेज में आयोजित इस सत्र में आचार्य प्रशांत जी ने एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए बताते हैं कि डॉ. अम्बेडकर का मार्ग केवल संवैधानिक सुधारों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक गहरी चेतनात्मक क्रांति का आह्वान था। आरक्षण, प्रतिनिधित्व और संस्थागत समानता से समाज को दिशा तो मिली, पर जातिवाद की जड़ें आज भी धार्मिक आस्थाओं, सांस्कृतिक संस्कारों और मानसिक संरचनाओं में जीवित हैं। जब तक हम धर्म की विकृत परिभाषा को चुनौती नहीं देते, और अपने भीतर के द्वंद्व को नहीं समझते, तब तक कोई भी बदलाव अधूरा रहेगा। यह संवाद उन सभी के लिए है जो सामाजिक परिवर्तन को केवल बाहरी सुधार नहीं, बल्कि मूलभूत स्तर पर चेतना के क्रांतिकारी रूपांतरण के रूप में देखना चाहते हैं। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06