🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें: https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #parampa #guru #shrimadbhagwatgeeta #godisone वीडियो जानकारी: 7.07.24, अनौपचारिक सत्र अगर सत्य एक है तो सब धर्मों के भगवान/गॉड अलग-अलग क्यों? || आचार्य प्रशांत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 0:01 - गुरु कौन 0:51 - विविध धर्म और विविध भगवान 2:01 - मानव निर्मित भगवान (Man made God) 5:10 - पितृ सत्ता की प्रधानता 7:36 - किस्से कहानियों की प्रचलन 10:35 - वेदांत की दृष्टि 11:26 - मुक्ति हमारा धर्म 12:59 - गीत पढ़ने का महत्व 14:44 - वास्तविक शक्ति - चेतना 18:25 - संतों की वाणी 19:01 - एकलव्य का उदाहरण 22:02 - समापन विवरण : इस वीडियो में आचार्य प्रशांत विभिन्न धर्मों और उनके ईश्वर के विचारों पर चर्चा करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे लोग अपने-अपने विश्वासों के अनुसार ईश्वर की छवि बनाते हैं, जो अक्सर उनके अपने पूर्वाग्रहों और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित होती है। आचार्य जी का कहना है कि सत्य एक है, लेकिन विभिन्न धर्मों में ईश्वर की परिभाषा और रूप भिन्न होते हैं। वे यह भी बताते हैं कि ईश्वर की अवधारणा थियोलॉजी का उत्पाद है, जबकि सत्य दर्शन का विषय है। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि ईश्वर की छवि अक्सर मानव के रूप में बनाई जाती है, जिससे अहंकार और पूर्वाग्रह बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्य को समझने के लिए किसी विशेष गुरु या परंपरा की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आत्मा ही अंतिम गुरु है। आचार्य जी ने यह भी बताया कि हमें अपने पूर्वाग्रहों को छोड़कर सत्य की ओर बढ़ना चाहिए और यह कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति पर निर्भर रहना अनिवार्य नहीं है। प्रसंग: ~ ऊर्जा के सही उपयोग के लिए सद्बुद्धि क्यों आवश्यक है? ~ क्या हमारे भीतर असीम बल छिपा हैं? ~ असीम बल का क्या आशय है? ~ हम अधिक शक्ति क्यों चाहते हैं? ~ क्या सद्बुद्धि ऊर्जा से भी अधिक मूल्यवान है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~