🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprasant #swarg #mukti #lifeafterdeath #heaven वीडियो जानकारी: 09.10.23, संत सरिता, ग्रेटर नॉएडा जो स्वर्ग-नर्क को मानते हैं, वो मुक्ति कभी नहीं पाएँगे || आचार्य प्रशांत (2023) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 0:01 - मनुष्य की परेशानी 0:31 - ‘मैं; और ‘मेरा’ 5:41 - अस्तित्व- एक समस्या 10:18 - पश्चिम का उन्नत दर्शन 16:17 - निराश और निर्मोह 19:51 - अहंकार ही मिथ्या 24:32 - मानव शास्त्र 28:14 - अवसाद से मुक्ति 31:30 - पुण्य और परलोक की कल्पना 36:41 - भारत का वेदांत दर्शन 39:53 - स्वर्ग की कल्पना 43:21 - अनाश्रित जीवन 46:06 - ब्रह्मलीन होने का सच 51:25 - आध्यात्मिक गुरुओ का मायाजाल 53:08 - उच्चतम की प्राप्ति 58:42 - समापन विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने मानव जीवन की मूलभूत समस्याओं पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि इंसान की बेचैनी और दुख का मुख्य कारण उसकी सीमाएं और अहंकार हैं। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि जीने का अर्थ केवल दुख सहना नहीं है, बल्कि जीवन में संतोष और आनंद प्राप्त करना भी संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि मृत्यु के बाद की कल्पनाओं में उलझने के बजाय, हमें वर्तमान में जीने और अपने भीतर की पहचान को समझने की आवश्यकता है। आचार्य जी ने यह भी बताया कि भारतीय दर्शन में यह संभव है कि हम जीते जी चैन और संतोष प्राप्त कर सकते हैं, बिना किसी बाहरी वस्तु या पहचान के। उन्होंने यह विचार प्रस्तुत किया कि हमारी बेचैनी का समाधान केवल बाहरी चीजों को इकट्ठा करने में नहीं है, बल्कि अपने भीतर की पहचान को समझने और उसे स्वीकारने में है। आचार्य जी ने यह भी कहा कि हमें अपने अस्तित्व के लिए किसी बाहरी चीज पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानना चाहिए और अपने जीवन को आनंदमय बनाना चाहिए। प्रसंग: ~ मनुष्य की बुनियादी बेचैनी कौनसी है ? ~ निराशा क्यों जरुरी है ? ~ हम हमारी ही चीजों से परेशान क्यों है ? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~