🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #नवरात्रि #दुर्गासप्तशती #Navratri2025 वीडियो जानकारी: 21.09.2025, ग्रेटर नोएडा Title: माँ का मर्म समझें — पर्व को तमाशा न बनाएँ || आचार्य प्रशांत, दुर्गासप्तशती पर (2025) 📰 Source : https://docs.google.com/document/d/1qcqbGhG_ffOK_m7tnhdZTJRtT5uVB4p3b2lvNBFJXZM/edit?usp=sharing 📋 Chapters: 00:00 - Intro 01:35 - नवरात्रि व्रत का असली अर्थ 08:38 - जब देवी रुष्ट होती हैं 13:54 - या देवी सर्वभूतेषु 20:33 - त्योहार कैसे मनाएँ? 28:15 - Testimonial विवरण: इस वीडियो में एक युवा श्रोता आचार्य जी से यह मौलिक प्रश्न पूछती है कि क्या नवरात्रि पर व्रत न रखना धर्मविरुद्ध है, और क्या देवी माता उससे रुष्ट हो जाएँगी। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि दुर्गा सप्तशती एक प्रतीकात्मक ग्रंथ है, जो जीवन के वास्तविक अर्थ और मुक्ति के मार्ग की ओर संकेत करता है। वे बताते हैं कि नवरात्रि के नौ दिन केवल व्रत रखने या विशेष भोजन करने के लिए नहीं हैं—बल्कि अपने भीतर की अज्ञानता, अहंकार और पाशविक प्रवृत्तियों को पहचानकर, उनसे मुक्ति का संकल्प लेने के लिए हैं। हलवा-पूड़ी, बलि और शोर-शराबे से माँ प्रसन्न नहीं होतीं; माँ वही हैं जो बोध, निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होती हैं। यह संवाद उन सभी के लिए अनिवार्य है, जो नवरात्रि को केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मबोध और प्रकृति को समझने का एक दुर्लभ अवसर मानते हैं। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 ~~