🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant वीडियो जानकारी: 08.08.23, भगवद्गीता सत्र, गोवा Title: कितनी तनख्वाह है आपकी? (सैलरी बढ़ाने का एक अचूक तरीका) || आचार्य प्रशांत (2023) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 0:45 - कॉर्पोरेट जीवन में करुणा 2:11 - प्रॉफिट के प्रकार 3:11 - सीटीसी और काम का मूल्य 5:20 - लाभ की गणना 9:30 - काम का अर्थ 10:22 - काम की दो धाराएँ 12:47 - मूल्यांकन की समस्या 15:26 - इनर और आउटर सैलरी का संतुलन 18:15 - निर्धनता और धन का सही अर्थ 19:24 समापन विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने "इनर सैलरी" और "आउटर सैलरी" के बीच के अंतर पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि बाहरी सैलरी (जैसे कि सीटीसी) केवल एक संख्या है, जबकि आंतरिक सैलरी वह संतोष और अनुभव है जो व्यक्ति अपने काम से प्राप्त करता है। आचार्य जी ने कबीर के एक उद्धरण का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि जो लोग केवल बाहरी सैलरी पर निर्भर हैं, वे वास्तव में निर्धन हैं। आचार्य जी ने यह भी बताया कि करुणा और कर्तव्य का पालन करते हुए काम करना अधिक महत्वपूर्ण है, और यह कि हमें अपने काम में आनंद और संतोष खोजना चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि असली धन वही है जो आंतरिक संतोष और अनुभव से आता है, न कि केवल वित्तीय लाभ से। प्रसंग: ~ निस्वार्थ होकर करुणा के साथ काम कैसे करे ? ~ कौनसा काम निस्वार्थ होता है ? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~