🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #affirmations #manifestation #dharma #superstition #आचार्यप्रशांत वीडियो जानकारी: 20.04.2025, भोपाल Title: नारियल बाद में फोड़ना, पहले अज्ञान फोड़ो || आचार्य प्रशांत (2025) 📰 Source : https://docs.google.com/document/d/1LbELzCAtFbhSTFlOGgL6r_tTnEZYdlejt_Pwd1yyX20/edit?usp=sharing 📋 Chapters 00:00 – Intro 01:18 – पुरखों की परम्परा कैसे त्याग दूँ? 06:47 – अतीत का डरावना चेहरा 15:20 – मैनिफेस्टेशन: एक आधुनिक टोटका? 23:57 – Testimonial विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी बताते हैं कि परंपरा और अंधविश्वास का असली भेद केवल एक प्रश्न से खुलता है—“क्यों?” जो प्रथा सिर्फ़ इसलिए निभाई जाए कि वह सदियों से चली आ रही है, वही अंधविश्वास है; चाहे वह नारियल फोड़ना हो, व्रत-उपवास हो या आज का मैनिफेस्टेशन (manifestation) और अफ़र्मेशन (affirmation)। धर्म वहीं है जहाँ कामना समाप्त होती है और जिज्ञासा जीवित रहती है, जबकि लोकधर्म और टोटके केवल अंधी इच्छाओं का विस्तार हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि अतीत से केवल वही लेना सार्थक है जो कालातीत है—बाकी सब हमें अंधकार में ही डुबो देता है। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 ~~