🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #AcharyaPrashant #आचार्यप्रशांत वीडियो जानकारी: 28.04.2025, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली Title: वो नकली चेहरे दिखा रहे? हमें बहका रहे या खुद को गिरा रहे? || आचार्य प्रशांत, हिन्दू कॉलेज DU (2025) 📋 Video Chapters: 00:00 - Intro 01:12 - हमारे सारे चेहरे उधार के हैं 05:03 - भेड़ चाल में क्यों फंस जाते हो? 11:57 - माया की सबसे ख़तरनाक चाल! 16:30 - दौड़ सब रहे हैं, लेकिन किस ओर? 22:55 - परिणाम चाहिए छप्पर फाड़ के! 27:45 - काम कैसा होना चाहिए? 32:12 - कामना से भी आगे की बात 36:01 - अपराध, अपने ही खिलाफ! 42:22 - काम सही हो, तो बाक़ी सब बोनस! 49:26 - Testimonial विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों से संवाद करते हुए विद्यार्थी जीवन से जुड़े कुछ प्रश्नों का उत्तर देते हैं। वे बताते हैं कि हम समाज में नकली चेहरे इसलिए पहनते हैं क्योंकि हमें दूसरों से कुछ चाहिए होता है—और यही इच्छा हमें झुकने, डरने और मुखौटे पहनने को मजबूर करती है। वे स्पष्ट करते हैं कि जब तक कामनाओं के पीछे छिपे खोखलेपन को नहीं समझा जाएगा, तब तक न हम अपने निर्णयों में स्वतंत्र हो पाएँगे, न ही प्रक्रिया का मूल्य समझ पाएँगे। अध्यात्म का अर्थ बाहरी वैभव से विमुख होना नहीं है, बल्कि अपनी आंतरिक उलझनों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का साहस विकसित करना है। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~