पहला भाग: सुनो, झुन्नूलाल ! || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2024) वीडियो लिंक: https://youtu.be/rijdjMpYgwU ➖➖➖➖➖➖➖➖ 🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #Mansoor ##SwamiVivekanand #GuruTeghBahadur #ManavAdhikar वीडियो जानकारी: 26.01.24, बातचीत सत्र, ग्रेटर नॉएडा अलविदा, झुन्नूलाल! || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 1:42 - झुन्नूलाल के जीवन का वर्णन 'Listen, Little Man' किताब से 16:50 - गुरु तेग बहादुर जी की कहानी 25:49 - खतरनाक और डरा हुआ झुन्नूलाल 37:03 - मानवता का खुफ़िया इतिहास 53:06 - झुन्नूलाल की बुराइयाँ और कमजोरियाँ 1:05:03 - हमारे केंद्र में झुन्नू बैठा है 1:09:34 - Wilhelm Reich की कहानी 1:14:46 - प्रेम में प्रयास ही पुरुष्कार है 1:19:49 - समापन विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने मानवता के विकास और महान व्यक्तियों के संघर्षों पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि कैसे समाज में सामान्य लोग (झुन्नु) महान लोगों (जैसे मंसूर, जीसस, और स्वामी विवेकानंद) के प्रति द्वेष और नफरत रखते हैं। आचार्य जी ने यह भी बताया कि महान लोग समाज के लिए अपने जीवन का बलिदान देते हैं, जबकि सामान्य लोग उनकी महानता को नहीं समझते और उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में जो लोग सच्चाई और ज्ञान की बात करते हैं, उन्हें अक्सर उपेक्षित किया जाता है और उनके खिलाफ साजिशें की जाती हैं। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि सच्ची महानता केवल उन लोगों में होती है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता के लिए काम करते हैं। प्रसंग: सुनो, छोटे आदमी! विल्हेम रीच द्वारा १९४५ में (Listen, Little Man! by Wilhelm Reich) ➖➖➖➖➖➖ ~ अहंकार क्या है? ~ क्यों नेतृत्व महान लोगों के हाथों में होना बहुत ज़रूरी है? ~ क्यों हम एक ओर तो जैसे है वैसा रहना नहीं चाहते और दूसरी ओर जब वास्तविक बदलाव आने लगता है तो हम बदलाव लाने वाले के दुश्मन बन जाते हो? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~