संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 01.06.2014, अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा, भारत प्रसंग: ~मत बताओ कि क्या जानते हो, दिखाओ कि तुम हो क्या? ~"सुपच भक्त की पनहि में, तुलै न काहू शीश" का क्या आशय है? ~संत कबीर क्यों बता रहें है कि पंडित और भक्त में समर्पण होना चाहिए? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ दोहा: कुलवन्ता कोटिक मिले, पण्डित कोटि पचीस | सुपच भक्त की पनहि में, तुलै न काहू शीश ||