🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #bhagwatgeeta #gita #motivation #indriya #body #mann #chetna #intelligence वीडियो जानकारी: 08.12.23, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा Title : (गीता-33) क्या आप अपना जीवन बेहतर बनाना चाहते हैं? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 1:03 - श्रेष्ठ कौन है? और यह किसके लिए है? 8:59 - अध्यात्म का उदय 17:08 - जड़ता और उथले स्वार्थ में से बेहतर क्या? 21:20 - गीता - अध्याय 3, श्लोक 42 की व्याख्या 26:33 - देह और अहंकार की चोट में अंतर 31:16 - इंद्रियों से मन तक की यात्रा 43:52 - चैन की तलाश और अहंकार 45:11 - बुद्धि सदा मन से ऊपर 49:23 - बुद्धि पर अनुशासन क्यों जरूरी है? 54:20 - गलत बंधनों के प्रति आकर्षण 1:00:28 - वास्तविक गुलामी क्या है? 1:01:37 - भजन 1:01:39 - समापन प्रसंग: स्वार्थ जब उथला हो तो बुरा है, जब गहरा होता है तो परमार्थ होता है। बुद्धि किसकी ग़ुलाम है उससे तय होगा कि आपकी ज़िंदगी का होने क्या वाला है। बुद्धि अपना काम तभी ठीक कर पाती है, जब उसे सच से प्रेम होता है। आपका काम सिर्फ गलत बंधनों को छोड़ना नहीं, आपका काम गलत बंधनों को छोड़कर सही बंधनों को पकड़ना है। सही बंधनों को पकड़ो इसी में तुम्हारी मुक्ति है। संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~