🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #Acharyaprashant #ईशनिंदा #Blasphemy #Religion #Sentiments #ReligionAndViolence #TruthWithoutApology वीडियो जानकारी: 05.10.2025, वेदांत संहिता सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: धर्म भूल गए, भावनाओं का तमाशा बना लिया! || आचार्य प्रशांत (2025) 📋Chapters: 00:00 - Intro 01:22 - ईश-निंदा किसकी होती है? 11:11 - धार्मिक टकराव क्यों होते हैं? 18:28 - भावना किसकी आहत होती है? 24:33 - भावनाओं का सच 33:28 - कौन चला रहा है हमारी भावनाएँ? 43:51 - Testimonial विवरण: इस सत्र में आचार्य जी धर्म, ईशनिंदा, धार्मिक भावनाओं और भावनात्मकता की हमारी आधुनिक समझ पर गहराई से चर्चा करते हैं। दुनिया भर में “धार्मिक भावना आहत” होने पर उठने वाली प्रतिक्रियाएँ, दंगे, हिंसा, सेंसरशिप, सामाजिक तनाव, इन सब घटनाओं की जड़ में आखिर क्या होता है? क्या किसी भी रूप में सचमुच “ईश्वर की निंदा” संभव है, या यह अवधारणा हमारे बनाए हुए धर्म की कमजोरी को प्रकट करती है? जिन भावनाओं पर हम गर्व करते हैं, क्या वे वास्तव में हमारी अपनी होती हैं या किसी दूसरी व्यवस्था द्वारा संचालित? आचार्य जी इन प्रश्नों को केवल तोड़ते नहीं, बल्कि एक वेदांतिक दृष्टिकोण के द्वार खोलते हैं जहाँ धर्म भावना नहीं, जागरण बन जाता है। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 ~~