Coverage of his work in the national and international press: his gatherings, dialogues, recognitions, and milestones.

Renowned philosopher and bestselling author Acharya Prashant returned to India on Sunday after presenting eloquently on Indian philosophy, Vedanta and Upanishads at renowned global forums like Oxford University, Cambridge University and the UK Parliament. A large crowd gathered at Indira Gandhi International Airport to greet him with the tricolor, welcome messages, and congratulatory letters.

Nearly 145 years after Max Muller carried the Isha Upanishad to Oxford as a scholarly object, Acharya Prashant returned it to the same university as a living teaching — arguing, in the very building where economics and policy are taught, that no external solution can resolve humanity's crises without first examining the consuming ego that drives them.
दैनिक भास्कर में प्रकाशित लेख के अनुसार ग्रेटर नोएडा में आयोजित 'गीता समागम' श्रृंखला के तीसरे अध्याय 'कर्मयोग' पर आचार्य प्रशांत ने सत्र का संचालन किया। इस सत्र में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत कर, आम लोगों के जीवन को अर्थपूर्ण और आसान बनाने की दिशा में मार्गदर्शन दिया।

Philosopher Acharya Prashant returned to India on Sunday after a landmark leg of his United Kingdom tour that took him to the platforms of Oxford University, Cambridge and the UK Parliament, where he placed the teachings of Vedanta and Indian Philosophy at the centre of global discourse on some of the defining questions of our times.

In 1879, Professor Max Muller carried the Ishavasya Upanishad to the West, publishing its first English translation through Oxford University Press as the opening volume of the 'Sacred Books of the East'. Nearly a century and a half later, an Indian philosopher has arrived at the same university to return the text to its living meaning.
FOR THE PRESS

Discover Acharya Prashant's practical wisdom on emotional management and anxiety reduction in The Hans India. As an esteemed Vedanta teacher, he offers insightful strategies to cultivate emotional resilience and inner peace, essential for navigating life's challenges with clarity and calmness.



आचार्य प्रशांत ने अमर उजाला में अपने लेख में बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए धर्मग्रंथों का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने गीता का उदाहरण देकर समझाया कि सत्य की प्राप्ति और आत्मज्ञान के लिए धर्मग्रंथों की ओर जाना महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में धार्मिक स्थल केवल पर्यटन स्थल बनकर रह गए हैं, जबकि उनका असली उद्देश्य आध्यात्मिकता और ज्ञान का प्रसार करना है।


इस लेख में आचार्य प्रशांत ने गहराई से विश्लेषण किया है कि क्यों गलत आदतें और विचारधाराएं हमारे जीवन से हटने का नाम नहीं लेतीं। उन्होंने बताया कि गलतियों को पकड़कर रखने का कारण हमारा मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक जकड़न है। लेख में आचार्य प्रशांत ने आत्मनिरीक्षण और आत्मज्ञान के माध्यम से इन गलतियों से मुक्ति पाने के उपाय सुझाए हैं। - Loledg

दैनिक जागरण के इस लेख में आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं पर आधारित जीवन के गहरे अर्थ का रहस्य उजागर किया गया है। जानें कैसे आत्म-ज्ञान और स्वाभाविकता से जीवन बदल सकता है! पढ़ें और खोजें।

यह लेख दैनिक भास्कर में आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं के अनुसार, अध्यात्म को एक आंतरिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है। यह उन लोगों के लिए है जो भौतिकता से संतुष्ट नहीं हैं और जिनमें विवेक, वैराग्य, और मुक्ति की तीव्र इच्छा है। आत्म-जागरूकता के माध्यम से, हम अपने जीवन में गहराई और सच्ची संतोष की खोज कर सकते हैं।

"जागरण" अखबार में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने धर्म परिवर्तन के पीछे के लालच और वास्तविक कारणों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर और उनके अनुयायियों के उदाहरण से यह समझाने की कोशिश की है कि धर्म परिवर्तन केवल सतही बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामाजिक और व्यक्तिगत कारण होते हैं। लेख धर्म परिवर्तन के गहन पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर देता है।

"दैनिक लोकदेश" में प्रकाशित इस लेख में बताया गया है कि आचार्य प्रशांत को पेटा ने 2022 का 'मोस्ट इन्फ्लुएंशियल वीगन' अवार्ड प्रदान किया। उन्हें पशु अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और अहिंसा पर आधारित उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है। आचार्य प्रशांत ने इस अवसर पर कहा कि अहिंसा एक सशक्त आध्यात्मिक मार्ग है और उन्होंने शुद्ध शाकाहार को अपनाने की प्रेरणा दी।

दैनिक भास्कर - यह लेख आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं के माध्यम से यह दर्शाता है कि दुःख केवल असली इच्छाओं की अप्राप्ति है, और इस ज्ञान के अभाव में मनुष्य दुख भोगता है। लेख में यह बताया गया है कि सतही सुखों से वास्तविक दुःख का समाधान नहीं होता; असली मुक्ति के लिए हमें अपने भीतर के दुःख का सामना करना होगा। अंत में, यह हमें अपने भीतर के दुःख की असलियत को पहचानने और उसे छोड़ने का पाठ पढ़ाता है।

Acharya Prashant spoke at IIM Nagpur. Hosted by Dr. Bhimaraya Metri, the event focused on overcoming obstacles to live fearlessly and reach one's true potential. Acharya Prashant's profound insights provided students with clarity and courage to pursue meaningful goals. Insights on Fearless Living - Business News This Week

आचार्य प्रशांत ने "मयूर संवाद" में बताया कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उन्हें उनकी स्वाभाविकता और मौलिकता के साथ बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों पर शैक्षिक सफलता का बोझ डालने के बजाय, उनके खेल-कूद और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना जरूरी है। बच्चों को उनके तनाव से मुक्त करने के लिए उन्हें अपनी रुचियों को खोजने और उनके अनुसार बढ़ने का अवसर देना चाहिए।

Acharya Prashant explores the deep connection between spirituality and mental health, emphasizing the importance of understanding the mind's dualities. He argues that true mental well-being involves transcending the mind's inherent polarities and discovering the unchanging, incorruptible core within oneself.

दैनिक भास्कर के इस लेख में आचार्य प्रशांत ने दुःख की मूल प्रकृति और उसकी परिभाषा को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया है कि असली कामना की अप्राप्ति ही दुःख है, जबकि नकली सुख क्षणिक होता है। दुःख से मुक्ति के लिए अपने भीतर के दुःख के मूल को पहचानना और उस पर काम करना आवश्यक है।

जागरण - जीवन मंत्र: आचार्य प्रशांत के अनुसार, व्यक्ति के जीवन को संवारने और बिगाड़ने में दो चीजें महत्वपूर्ण होती हैं। घर और दफ्तर में बिताया गया समय व्यक्ति की सोच और व्यवहार को प्रभावित करता है। सही संगति और वातावरण का चयन करना आवश्यक है, क्योंकि ये जीवन संवारने में मदद कर सकते हैं।

दैनिक भास्कर - आचार्य प्रशांत के इस लेख में मन की स्थिति और आंतरिक विकास पर गहरा विमर्श किया गया है। उन्होंने उपनिषदों और वेदांत के महत्व को उजागर करते हुए बताया कि वर्तमान में लोग सतही बातों में उलझे हुए हैं, जबकि वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। आचार्य प्रशांत का यह संदेश है कि आंतरिक विकास के लिए ज्ञान की गहराई में जाना आवश्यक है।

"स्वतंत्र चेतना" में आचार्य प्रशांत ने इंटरनेट के युग में किताबों की घटती लोकप्रियता पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि डिजिटल मीडिया और मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के कारण किताबों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। आचार्य प्रशांत ने कहा कि किताबें गहन ज्ञान और आत्म-विश्लेषण के लिए आवश्यक हैं, और उनके बिना समाज में गंभीरता और समझ का अभाव हो सकता है।

"दैनिक लोकदेश" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने ग्लोबल वार्मिंग के खतरों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि हम लगातार विनाश की ओर बढ़ रहे हैं और इसे रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण मिल सके।

"दैनिक लोकदेश" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने नई कहानी लिखने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि बदलाव लाने के लिए जागरूक होना जरूरी है और हमें अपने पुराने विचारों और प्रथाओं को बदलने की हिम्मत करनी चाहिए। आचार्य प्रशांत ने बताया कि अगर हम बड़े बदलाव की चाह रखते हैं, तो हमें खुद को और समाज को बदलने के लिए आगे आना होगा और नए दृष्टिकोण अपनाने होंगे।

"अमर उजाला" में आचार्य प्रशांत के लेख में बताया गया है कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट और अडिग है, तो सफलता सुनिश्चित है। आचार्य प्रशांत ने इस पर बल दिया कि जीवन में सच्ची सफलता वही है, जो आत्म-बोध और आत्म-साक्षात्कार से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया की उपाधियों और उपलब्धियों से परे, अपने अंदर के सत्य को जानना और उसके अनुसार जीवन जीना ही असली सफलता है।

नॉएडा व्यूज - आचार्य प्रशांत के इस लेख में मन की स्थिति और आंतरिक विकास पर गहरा विमर्श किया गया है। उन्होंने उपनिषदों और वेदांत के महत्व को उजागर करते हुए बताया कि वर्तमान में लोग सतही बातों में उलझे हुए हैं, जबकि वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। आचार्य प्रशांत का यह संदेश है कि आंतरिक विकास के लिए ज्ञान की गहराई में जाना आवश्यक है।

FE Leisure: Acharya Prashant emphasizes that real yoga addresses the mind, not just the body, focusing on uniting the fragmented mind for true mental well-being. He argues that the widespread belief in yoga as primarily physical is the biggest obstacle to its true practice.

"अमर उजाला" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने बताया कि लोग किसी लक्ष्य पर इसलिए नहीं चल पाते क्योंकि उनकी लक्ष्य-निर्धारण प्रक्रिया ही गलत होती है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति आत्मबोध और स्व-अवलोकन के माध्यम से अपने सच्चे उद्देश्यों को नहीं समझता, तब तक उसे अपने लक्ष्यों में सफलता नहीं मिल सकती। आचार्य प्रशांत ने सही दिशा में समर्पित और संकल्पित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।


xpert times: Explore Acharya Prashant's practical advice for managing workplace stress and finding deeper purpose in daily life, featured exclusively in a compelling article. His insights offer actionable strategies to enhance resilience and fulfillment in both professional and personal realms.

Hindustan Times Exclusive: Acharya Prashant discusses strategies for managing workplace stress and finding deeper meaning in daily life. He emphasizes identifying stressors and dedicating oneself to meaningful pursuits to reduce worry and anxiety, offering practical insights for resilience and personal growth.

आचार्य प्रशांत ने अमर उजाला में कहा कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए निडरता जरूरी है। उन्होंने बताया कि डर के अनुभव से गुजरने पर ही हम अपने वास्तविक सामर्थ्य को पहचान पाते हैं। आचार्य प्रशांत ने निडर जीवन पर आयोजित कार्यशाला में यह भी समझाया कि डर को पहचानना और उसका सामना करना महत्वपूर्ण है। डर से बचने के बजाय उसका सामना करने से ही हम जीवन में सच्ची प्रगति कर सकते हैं।

हिन्दुस्तान - आचार्य प्रशांत ने 'निडर जीवन' पर कार्यशाला में बताया कि जीवन एक जंग है, जिसमें कोई भी अछूता नहीं। सही कार्य में खुद को झोंकने से ही डर को पार किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों से बातचीत में कहा कि डर केवल एक विचार है, न कि कोई वास्तविकता, और इसे समझना जरूरी है।

The Hans India: Acharya Prashant provides profound insights into spirituality, positive thinking, karma, and meditation in a thought-provoking article. His perspectives challenge conventional beliefs, offering a fresh approach to spiritual understanding and personal growth.

आचार्य प्रशांत ने "दैनिक भास्कर" में बताया कि मांसाहार से पृथ्वी पर असंतुलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मांसाहार न केवल पशुओं के प्रति क्रूरता है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। आचार्य प्रशांत ने समझाया कि शाकाहार अपनाने से हम न केवल अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं, बल्कि पृथ्वी की रक्षा भी कर सकते हैं।

आचार्य प्रशांत ने "जागरण" में कहा कि अपनी कहानी खुद लिखने का संकल्प लेना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जीवन की दिशा हमें खुद निर्धारित करनी चाहिए, न कि परिस्थितियों पर निर्भर रहना चाहिए। आचार्य प्रशांत ने जोर दिया कि आत्म-ज्ञान और सत्य की राह पर चलकर ही हम अपने जीवन की वास्तविक कहानी लिख सकते हैं।

आचार्य प्रशांत ने "अमर उजाला" में कहा कि हमारे निर्णय हमारी सफलता की कहानी गढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि सही निर्णय लेना ही सच्ची सफलता की कुंजी है। आचार्य प्रशांत ने जोर दिया कि निर्णय लेते समय हमें अपने आंतरिक सत्य और वास्तविक उद्देश्य को ध्यान में रखना चाहिए। सही निर्णय वही है जो हमें आत्मज्ञान और आंतरिक शांति की ओर ले जाए, न कि केवल बाहरी उपलब्धियों की ओर। लेख में उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए सही निर्णय लेने के महत्व पर प्रकाश डाला।

रॉयल बुलेटिन - आचार्य प्रशांत के अनुसार, भागवत पुराण 18 पुराणों में सबसे प्रचलित और सम्मानित है, जिसमें वेदों और उपनिषदों के गूढ़ सिद्धांतों को सरल कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने भागवत पुराण की चुनिंदा कथाओं की वेदांत-सम्मत व्याख्या की है, जो पाठकों को पौराणिक कहानियों के गूढ़ अर्थों से परिचित कराती है। यह व्याख्या आध्यात्मिकता के निरंतर पतन के बीच एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति की दिशा में एक कदम है।

आचार्य प्रशांत ने "अमर उजाला" में बताया कि सच्चा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती का सामना करते समय ईमानदारी और पूर्ण समर्पण से कार्य करना ही महत्वपूर्ण है। चाहे परिणाम हार हो या जीत, यह मायने नहीं रखता, बल्कि मायने रखता है उस प्रक्रिया में आपकी ईमानदारी और निष्ठा। आचार्य प्रशांत ने सिखाया कि बाहरी परिणामों पर ध्यान देने के बजाय, अपने आंतरिक सत्य के साथ जुड़कर कर्म करना ही सच्ची सफलता है।

"लोकदेश" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने कहा कि आध्यात्म संसार में आने का नहीं, बल्कि अंतिम विदाई का नाम है। उन्होंने समझाया कि सच्चा आध्यात्म व्यक्ति को माया और भ्रम से मुक्त करता है। आचार्य प्रशांत ने आत्मज्ञान की राह पर चलने और भौतिक इच्छाओं को त्यागने की आवश्यकता पर जोर दिया।

The India Education Diary: Acharya Prashant hosted a transformative Vedanta Mahotsav at IIT Delhi's Dogra Hall, uniting global alumni to explore the nexus between science and self-awareness. The event offered deep insights and fostered clarity and peace of mind.

The Hans India: The PrashantAdvait Foundation recently organized a Vedanta Mahotsav at IIT Delhi, exploring themes of science and self-awareness. The event drew global attention, highlighting Vedanta's profound solutions for contemporary challenges, as participants engaged deeply with Acharya Prashant's teachings.
राष्ट्र समाचार - आचार्य प्रशांत, प्रख्यात लेखक और वेदान्त मर्मज्ञ, ने भागवत पुराण की गूढ़ कथाओं की वेदांत-सम्मत व्याख्या प्रस्तुत की है। इस पुस्तक में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और अन्य कथाओं के माध्यम से वेदों और उपनिषदों के गूढ़ सिद्धांतों को सरलता से समझाने का प्रयास किया गया है। आचार्य प्रशांत का मानना है कि पौराणिक कथाओं का सही अर्थ जानने के लिए वेदांत का ज्ञान आवश्यक है, जिससे युवा पीढ़ी को वास्तविकता और अर्थों का ज्ञान हो सके।
Perfect News - प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के आचार्य प्रशांत ने आईआईटी में वेदांत महोत्सव के दौरान "विज्ञान और आत्म जागरूकता" पर व्याख्यान दिया और प्रश्नों का समाधान किया। आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्र और पूर्व सिविल सेवक, आचार्य प्रशांत ने अपनी गहरी वेदांत समझ से मानव मन की समस्याओं पर प्रकाश डाला। आयोजन ने दुनिया भर के पूर्व छात्रों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे उन्हें स्पष्टता और शांति का अनुभव हुआ।

आचार्य प्रशांत ने तीन दिवसीय वेदान्त महोत्सव में विज्ञान और आत्म-जागरूकता पर व्याख्यान दिया, जहां उन्होंने उपस्थित लोगों के सवालों के समाधान भी किए। आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्र आचार्य प्रशांत ने गहरी अंतर्दृष्टि के साथ मानव मन पर बात की। इस महोत्सव ने आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों का ध्यान आकर्षित किया और इसे सबसे प्रशंसित आयोजनों में से एक माना गया। - पंजाब केसरी

नवोदय टाइम्स - आचार्य प्रशांत, आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्र, ने वेदान्त महोत्सव में "विज्ञान और आत्म-जागरूकता" पर व्याख्यान दिया। आई.आई.टी. दिल्ली के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष ने उनके प्रवचनों की सराहना की। आयोजन समिति ने वेदान्त महोत्सव की सफलता पर गर्व जताया।

आचार्य प्रशांत ने "लल्लनटॉप" के न्यूज़ रूम में एक विशेष बातचीत में अपनी अद्वितीय दृष्टि साझा की। इस सत्र में उन्होंने आत्म-जागरूकता, विज्ञान, और जीवन के गहरे रहस्यों पर चर्चा की। उनके विचारों ने दर्शकों को नई सोच और प्रेरणा प्रदान की। इस सत्र में उनकी ज्ञानवर्धक अंतर्दृष्टि से भरपूर संवाद ने सभी को प्रभावित किया।

Siksha: At the Vedanta Mahotsav at IIT Delhi, Acharya Prashant explored the convergence of science and self-awareness. Covered by The Hans India, the event showcased his deep insights into Vedantic wisdom, providing attendees with clarity and spiritual understanding.

दैनिक भास्कर - आचार्य प्रशांत के अनुसार, शाकाहार केवल एक आहार प्रणाली नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो जीवन के प्रति संवेदनशीलता और करुणा को प्रोत्साहित करती है। दैनिक भास्कर के इस लेख में वे सिखाते हैं कि शाकाहार अपनाकर हम न केवल अपने स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं, बल्कि पर्यावरण और पशु कल्याण में भी योगदान दे सकते हैं।

जागरण - आचार्य प्रशांत के अनुसार, जन्माष्टमी को श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के बजाय, इसे आत्म-निरीक्षण का अवसर माना जाना चाहिए। वे बताते हैं कि श्री कृष्ण का सन्देश जन्म और मृत्यु की सीमाओं से परे है। इस दिन, हमें अपने बंधनों से मुक्त होकर ठहरना चाहिए और अपनी आंतरिक शक्ति की ओर देखना चाहिए, जो कि स्वयं कृष्ण का रूप है। आचार्य प्रशांत युवा पीढ़ी को अध्यात्म की सही राह दिखाते हैं।

राष्ट्रीय हिन्दी मेल - आचार्य प्रशांत के अनुसार, जन्माष्टमी को श्री कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में न मनाएं। श्रीकृष्ण का संदेश है कि जन्म-मृत्यु का कोई अस्तित्व नहीं है। इस अवसर पर, अपने भीतर देखें और आत्म-जागरूकता की ओर कदम बढ़ाएं। हर पर्व आपको बदलने और जीने का अवसर देता है। कृष्ण को न झुलाएं, बल्कि अपनी वास्तविकता का सामना करें।

दैनिक भास्कर - आचार्य प्रशांत के अनुसार, असली संतोष अपने अंदर खोजें। संतोष जीवन का अनमोल धन है, और इसे बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से प्राप्त किया जा सकता है। The Health Site के इस लेख में आचार्य प्रशांत के विचारों के माध्यम से संतोष पाने के उपायों पर प्रकाश डाला गया है।

Delve into Acharya Prashant's profound views on the intersection of science and spirituality, as covered by The Pioneer. He emphasizes the logical foundation of true spirituality, contrasting it with prevalent superstitions in today's spiritual market. Acharya Prashant's teachings highlight the importance of honesty and clarity in understanding both oneself and the world, advocating for a scientific approach that transcends mere materialism.

As published in the The Hindu, In "Ananda: Happiness Without Reason," Acharya Prashant explores the true essence of happiness, challenging common misconceptions and emphasizing that real happiness transcends material pursuits and conditional states of mind. The book aims to dispel the fuzzy, impractical notions about happiness and promotes a deeper understanding through intelligent spirituality. Acharya Prashant's work offers a transformative perspective on achieving lasting contentment and joy.

"Ananda" by Acharya Prashant, published by HarperCollins, explores the profound nature of laughter and tears, emphasizing their roots in spiritual detachment and deeper truths beyond personal desires. Featured in The Times of India.

अवसाद से मुक्ति के लिए आचार्य प्रशांत ने 5 कारगर उपाय साझा किए हैं। अंधी कामनाओं से बचें, आत्मज्ञान की ओर बढ़ें, और यादों के जाल में न उलझें। तनाव से भागने के बजाय उसे झेलने की क्षमता बढ़ाएं और सार्थक लक्ष्य चुनें, जो जीवन को दिशा और अर्थ प्रदान करे। (मीडिया हाउस: द हेल्थ साइट)

Media Infoline: Dive into Acharya Prashant's latest masterpiece, 'Ananda – Happiness without Reason,' published by HarperCollins. This insightful book challenges conventional views on happiness, drawing from scriptures like the Gita and Upanishads, inspiring readers to seek inner clarity and transcend fleeting emotions.
आचार्य प्रशांत ने ग्रेटर नोएडा में वेदांत महोत्सव में कहा कि महिलाओं को समान अधिकार मिलना चाहिए और उन्हें घर के बंधनों से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने विज्ञान के मानवहित में उपयोग और अंधविश्वास से बचने पर जोर दिया। प्रशांत अद्वैत संस्था प्रति माह वेदांत महोत्सव आयोजित करती है, जिसमें हजारों लोग भाग लेते हैं।— Federal भारत

राष्ट्रवादी - ग्रेटर नोएडा के अद्वैत बोधस्थल में आचार्य प्रशांत और मेनका गांधी के बीच पशुकल्याण वार्ता हुई, जिसमें युवा स्वयंसेवियों को जागरूक किया गया। आचार्य प्रशांत ने पशु हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई, जिससे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी। प्रशांत अद्वैत संस्था अगला वेदांत महोत्सव 15 से 17 जुलाई को गोवा में आयोजित करने जा रही है।

PUNJAB NEWS EXPRESS: Acharya Prashant's book "Ananda - Happiness Without Reason" (HarperCollins), shattering common misconceptions about happiness. Drawing from scriptures like the Gita and the Upanishads, he reveals that true joy, or Ananda, is an unconditional state free from both happiness and sadness. The book aims to dispel false notions and help readers understand the real meaning of joy as envisaged by Vedanta.

HI INDIA: Ananda - Happiness Without Reason" (HarperCollins) by Acharya Prashant challenges common misconceptions about happiness. Drawing insights from the Gita and the Upanishads, the book illuminates that true joy, or Ananda, transcends the dichotomy of happiness and sadness. It aims to dispel erroneous beliefs and guide readers towards understanding authentic joy as described by Vedanta, garnering significant acclaim ahead of its official release.

Lokmat Times: In "Ananda - Happiness Without Reason," Acharya Prashant dismantles common misconceptions about happiness, revealing the pursuit of true joy, or Ananda, beyond mere happiness and sadness. The book draws from scriptures like the Gita and Upanishads, offering practical insights into achieving unconditional joy.

प्राशांत अद्वैत फाउंडेशन ने ग्रेटर नोएडा के केसीसी कॉलेज में वेदांत महोत्सव का सफल आयोजन किया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में आचार्य प्रशांत ने प्राचीन शास्त्रों जैसे उपनिषद और गीता से मिलने वाले ज्ञान पर जोर दिया। आचार्य प्रशांत ने उपस्थित लोगों से सच्चे ज्ञान और आध्यात्मिक जागरूकता की शक्ति को अपनाने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वेदांत के गहन दर्शन और उनके समकालीन जीवन में महत्व के बारे में प्रेरित और शिक्षित करना था।

दैनिक भास्कर - आचार्य प्रशांत का संदेश: जीवन में सच्ची शांति की खोज में भौतिक चीजों का मोह त्यागना आवश्यक है। इस छवि में दिखाया गया एक सरल विचार हमें याद दिलाता है कि आंतरिक संतोष से बढ़कर कुछ नहीं।

राष्ट्रीय हिंदी मेल - आचार्य प्रशांत ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अवसर मिलना चाहिए। उनके विचारों से स्पष्ट होता है कि समाज में असली बदलाव तभी आएगा जब हम महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे।

In the article published in the City First, Acharya Prashant, founder of the Prashant Advait Foundation, explains that understanding and following Vedanta is key to being a Sanatani. He clarifies common misconceptions about Sanatan Dharma, emphasizing that true religious assertion must align with Shruti Pramana and Vedanta. Rituals and customs alone do not define a Sanatani; a deep understanding of spiritual scriptures is essential.

"जन विचार प्रवाह" में प्रकाशित संपादकीय में आचार्य प्रशांत ने सनातन धर्म की गहरी समझ की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने बताया कि धार्मिकता का असली अर्थ बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि इसकी आंतरिक गहराई में छिपा है। यह लेख धार्मिक शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सनातन धर्म के सच्चे अर्थ को जानने और समझने की प्रेरणा देता है।

"जन विचार प्रवाह" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने वेदों को ज्ञान की पूरी शृंखला के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने बताया कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की संपूर्णता को समझने के साधन हैं। वेदों में जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे विज्ञान, दर्शन, और आत्मज्ञान के बारे में विस्तृत ज्ञान समाहित है, जो आज भी प्रासंगिक है।

"राष्ट्रीय हिन्दी मेल" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने आत्म-विश्लेषण की महत्ता पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि हम स्वयं ही अपने सबसे बड़े मित्र और शत्रु होते हैं, और हमारी आंतरिक सोच और दृष्टिकोण हमारे जीवन के परिणामों को निर्धारित करते हैं। यह लेख आत्म-जागरूकता और आत्म-विकास के महत्व पर जोर देता है।

"दैनिक भास्कर" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने कहा कि अर्जुन की विजय श्रीकृष्ण के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने समझाया कि जीवन के युद्ध में जीतने के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आंतरिक शांति आवश्यक है, जिसे केवल श्री कृष्ण जैसी दिव्यता प्रदान कर सकती है। यह लेख आत्मज्ञान और मार्गदर्शन की महत्ता पर जोर देता है।

Acharya Prashant and Dr. Eban Goodstein engage in a comprehensive discussion on climate change published on Lead the change, consumer culture, and the role of education and technology in driving behavior change. Acharya Prashant clarifies that true Sanatanis are defined by their understanding and practice of Vedanta, not by rituals or customs. He emphasizes the need for religious assertions to align with Shruti Pramana for validity.

"अमर उजाला" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने युवाओं को मांसाहार त्यागकर शाकाहारी बनने की प्रेरणा दी है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था के प्रयासों से 50 लाख लोग मांसाहार छोड़ चुके हैं। आचार्य प्रशांत ने शाकाहार के स्वास्थ्य और पर्यावरण लाभों पर जोर दिया, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।

"सच कहूँ" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत की संस्था द्वारा किए गए प्रयासों से 50 लाख लोगों के मांसाहार छोड़ने की प्रेरणादायक कहानी बताई गई है। आचार्य प्रशांत ने जागरूकता और शाकाहार के लाभों को उजागर करते हुए युवाओं में बड़े बदलाव को प्रोत्साहित किया है। यह लेख पशु अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी जोर देता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।


FIRST INDIA NEWS: Acharya Prashant highlights the importance of avoiding irrelevant thoughts to maintain mental clarity. Speaking at the Vedanta Festival, he emphasized how such thoughts only increase restlessness and advised being cautious of influences.

"उत्तर भारत टाइम्स" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने बताया कि आत्मा के मंथन से उत्पन्न ज्ञानाग्नि ही अज्ञानता को समाप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि आत्मा की गहराइयों में जाकर आत्म-ज्ञान प्राप्त करना ही सच्चा समाधान है। यह लेख आत्म-साक्षात्कार और आत्म-ज्ञान की महत्ता पर जोर देता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

आचार्य प्रशांत ने "राष्ट्रीय हिन्दी मेल" में बताया कि सत्कार्य के लिए केवल एकाग्रता नहीं, बल्कि एकनिष्ठता आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मन को सही दिशा में केंद्रित करना और उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण ही सफलता की कुंजी है। सही दिशा में केंद्रित और समर्पित मन ही जीवन में सच्ची संतुष्टि और शांति प्राप्त करता है।

आचार्य प्रशांत ने "तरुण मित्र" में प्रकाशित इस लेख में बताया कि व्यर्थ चीजों को जीवन से हटाना ही सच्चा आध्यात्म है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन को सरल और सार्थक बनाने के लिए अनावश्यक वस्तुओं और विचारों को त्यागना चाहिए। यह लेख आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक शुद्धता के महत्व को उजागर करता है, जिससे व्यक्ति सच्ची शांति प्राप्त कर सकता है।

"हिन्द सागर" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने कहा कि व्यर्थ चीजों को जीवन से हटाना ही सच्चा आध्यात्म है। उन्होंने बताया कि जीवन को सरल और सार्थक बनाने के लिए अनावश्यक वस्तुओं और विचारों को त्यागना चाहिए। आचार्य प्रशांत ने आत्म-शुद्धि और आत्म-साक्षात्कार की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल आवश्यक और मूल्यवान चीजों पर ध्यान केंद्रित करने से ही सच्ची शांति और संतोष प्राप्त किया जा सकता है।

"राष्ट्रीय हिन्दी मेल" में आचार्य प्रशांत ने बताया कि मन हमेशा उलझन में क्यों रहता है। उन्होंने कहा कि यह उलझन हमारी आंतरिक और बाहरी असंगतियों का परिणाम है। आचार्य प्रशांत ने इस पर बल दिया कि जब तक हम अपने भीतर की सच्चाई को नहीं समझते और स्वीकारते, तब तक हमारा मन शांत नहीं हो सकता। लेख में उन्होंने आत्म-ज्ञान और सच्चाई की राह पर चलने की महत्ता पर जोर दिया है, जिससे मन की उलझनें समाप्त हो सकती हैं।

"स्वतंत्र चेतना" में आचार्य प्रशांत ने कहा कि पूरी दुनिया के सभी लोग छुपे हुए दर्द में जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह दर्द हमारे भीतर की अपूर्णता और आत्मा की शांति की कमी का परिणाम है। आचार्य प्रशांत ने कहा कि जब तक हम इस दर्द को पहचानते और स्वीकारते नहीं, तब तक सच्ची शांति प्राप्त नहीं कर सकते। लेख में उन्होंने आत्मज्ञान और आंतरिक शांति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।
"दोपहर मेट्रो" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने कहा कि सत्य की राह पर चलना ही सच्चा आध्यात्म है। उन्होंने अपनी यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे आईआईटी और आईआईएम से निकलकर सिविल सर्विसेज में कदम रखा और फिर आध्यात्म की ओर मुड़ गए। आचार्य प्रशांत ने सत्य और ईमानदारी को अपने जीवन का आधार बनाते हुए आत्म-ज्ञान और आंतरिक शांति प्राप्त की। लेख में उन्होंने युवाओं को भी सत्य की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया है।

"एक्सप्रेस न्यूज" में आचार्य प्रशांत ने बताया कि मृत्यु जीवन का परम सत्य है और इसे झुठलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जीवन की अनिश्चितता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझना ही सच्चा ज्ञान है। आचार्य प्रशांत ने इस सत्य को स्वीकारने की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि इससे हमें जीवन के वास्तविक अर्थ और उद्देश्य का बोध होता है। उन्होंने लोगों को आत्मज्ञान की दिशा में आगे बढ़ने और जीवन के हर पल को सार्थक बनाने की प्रेरणा दी।


United Business Journal: PrashantAdvait Foundation, led by Acharya Prashant, achieves unprecedented success with six books in the top eleven of Amazon's 'Spirituality' category. Known for disseminating Upanishadic wisdom, the Foundation's prolific publishing and innovative campaigns like Ghar-Ghar Upanishad are reshaping spiritual education and outreach.


"आचार्य प्रशांत ने केसीसी कॉलेज में वेदांत महोत्सव के दौरान महाभारत से जीवन के संघर्ष का महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि इस महाकाव्य में संघर्ष की शुरुआत से अंत तक की कहानी है, जो हमें सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, हार नहीं माननी चाहिए। महाभारत के पात्रों के फैसले लेने के तरीकों से यह भी स्पष्ट होता है कि आत्मनिर्भरता और सही निर्णय लेना कितना आवश्यक है। — जागरण"
"ऋषिकेश समाचार" में प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने वेदांत को भारत की समस्त दार्शनिक विचारधाराओं का स्रोत बताया है। आचार्य प्रशांत द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने किया। आचार्य प्रशांत ने कहा कि वेदांत भारतीय ज्ञान परंपरा का सार है और इसने सदियों से जीवन के गहनतम प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया है। लेख में उनके विचारों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, जो वेदांत की महत्वपूर्ण शिक्षाओं और उनके आधुनिक संदर्भ पर प्रकाश डालते हैं।

"अर्जुनों को है श्रीकृष्ण की आवश्यकता" शीर्षक से प्रकाशित इस लेख में आचार्य प्रशांत ने अपनी नई पुस्तकों 'महाभारत' और 'अद्भुत गीता' का विमोचन किया। उन्होंने बताया कि महाभारत और श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और आधुनिक अर्जुनों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकती हैं। आचार्य प्रशांत ने इन पुस्तकों के माध्यम से गीता के गहन ज्ञान और महाभारत की गाथाओं को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

आचार्य प्रशांत ने कहा कि युवा पीढ़ी ही समाज और राष्ट्र में बदलाव लाने में सक्षम है। उन्होंने युवाओं को जागरूकता और सक्रियता के माध्यम से समाज सुधार के लिए प्रेरित किया। आचार्य ने युवाओं को जिम्मेदारी, और आत्म-ज्ञान की महत्वपूर्णता समझाते हुए कहा कि वे अपने प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। -उत्तराखंड क्षेत्रीय समाचार पत्र

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