हर दिन, दुनिया भर में अरबों लोग बेचैनी और उलझन के साथ जागते हैं — ऐसी चीज़ों के पीछे भागते हुए जो उन्हें कभी संतुष्ट नहीं करतीं, ऐसे रिश्तों और आदतों में फँसे हुए जिन्हें वे समझ भी नहीं पाते।
दशकों से, यह मिशन इस अंधकार से सीधे टकराता रहा है। आचार्य प्रशांत की पुस्तकें एक ही उद्देश्य से हैं: हर उस इंसान का दुख कम करने के लिए, जो इन्हें पढ़े।
लेकिन अब यह लड़ाई संसाधनों की कमी से जूझ रही है। कागज़ महंगा हो रहा है। शिपिंग की लागत बढ़ रही है। और जो संसाधन हम नहीं जुटा पाते, उसका सीधा अर्थ है—किसी ऐसे व्यक्ति तक पुस्तक नहीं पहुँच पाएगी, जिसे उसकी सबसे अधिक ज़रूरत थी।
यह सिर्फ़ सहयोग माँगना नहीं है। यह आपको हमारे साथ खड़ा होने का आमंत्रण है। हमने अपनी तरफ़ से जो संकल्प लिया है, हम वह निभाते रहेंगे — बस चाहते हैं कि आप भी इस मिशन में हमारे साथ जुड़ें। अपना योगदान दें।
आपका सहयोग कहाँ लगता है:
- अनुवाद — इन पुस्तकों को गुजराती, तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और अन्य भाषाओं तक पहुँचाना
- पुस्तकों की कम कीमत — ज्ञान को हर इंसान की पहुँच में लाना
- बुक स्कॉलरशिप — जो आर्थिक तंगी में हैं, उन तक मुफ्त पेपरबैक पहुँचाना
- आईटी डेवलपमेंट — हमारी वेबसाइट और ऐप को बनाना और चलाना
- डिजिटल मार्केटिंग — महंगा ज़रूर है, पर नए पाठकों तक पहुँचने का सबसे बड़ा ज़रिया
- विशेषज्ञ टीम — प्रूफरीडर, अनुवादक, टाइपसेटर, डिज़ाइनर और मार्केटर, जो इन पुस्तकों को जीवंत बनाते हैं
कहीं कोई ऐसा इंसान है, जो कभी पुस्तकें खरीद ही नहीं पाया — और अब उसे पुस्तक मिलने वाली है, सिर्फ आपकी वजह से।